सोशल नज़र: बेलारूस की घटना पर रविश कुमार ने क्या लिखा पढ़िए!

रविश कुमार एक जाने माने पत्रकार हैं. भारत में जब मीडिया सबसे निचले स्थान पर पहुँच गया है उस दौर में भी रविश उन पत्रकारों में शामिल हैं जिन लोगो ने पत्रकारिता शब्द को अभी तक जीवित कर रखा है. रविश कुमार ने अपने ऑफिसियल फेसबुक अकाउंट पर बेलारूस के बारे में लिखा है. आपको बता दें की बेलारूस में हाल ही में चुनाव हुए हैं और चुनाव के बाद से विपक्षी नेता के समर्थक और आम जनता सड़कों पर उतरकर सरकारी मीडिया चैनल से मांग कर रहें हैं कि “लोगो को सच दिखाओ”.

पढ़े : रविश कुमार ने बेलारूस की घटना पर क्या लिखा है

“लोगों का सच दिखाओ” नारे के साथ लोगों ने घेरा बेलारूस के सरकारी टीवी को

बेलारूस में भी एक सरकारी टेलिविज़न है जैसे भारत में। वहाँ पर चुनाव हुए हैं। अलेक्ज़ेंडर लुकाशेन्को 1994 से राष्ट्रपति के पद पर हैं। हाल के चुनाव में उन्हें 80 प्रतिशत मत मिले हैं। विपक्ष की उम्मीदवार श्वेतलाना तिखानोवासक्या को 10 प्रतिशत मिले हैं। उनके समर्थक और जनता सड़क पर है कि चुनाव में बेईमानी हुई है।

नतीजों वाले दिन जब लोग प्रदर्शन कर रहे थे तब सरकारी चैनल ने नहीं दिखाया। इस तरह से दिखाया कि ये हिंसा करने वाले प्रदर्शनकारी हैं। उनकी बातों को ग़ायब कर दिया। ख़बरों के सेंसर करने के विरोध में सरकारी चैनल के कई पत्रकारों ने इस्तीफ़ा दे दिया। चैनल के सौ के क़रीब कर्मचारी मुख्यालय की इमारत से बाहर आए और प्रदर्शन में शामिल हो गए।

यहाँ तक की सारी जानकारी BBC के लेख से है।

दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां लोकतंत्र के नाम पर चुनाव तो होते हैं मगर नतीजे नहीं बदलते हैं। चीन और रूस का हाल जानते हैं। आख़िरी वक्त में ऐसे प्रदर्शनों का मतलब नहीं रह जाता है। इसलिए ख़त्म होने से पहले जागना चाहिए। क्योंकि अब सत्ता के पास ऐसे तंत्र आ गए हैं जिससे कई दशक तक खुद को क़ाबिज़ किया जा सकता है। पहले के बदलावों के उदाहरण काम के नहीं रहे। होते तो दुनिया में कहीं दिखते। रूस के राष्ट्रपति ने बेलारूस के राष्ट्रपति को समर्थन कर दिया है।

भारत में प्राइवेट न्यूज़ चैनल ही जनता का सच नहीं दिखाते।
यह आप जानते हैं। आपको फ़र्क़ नहीं पड़ता। यही राहत की बात है। तभी तो जो ऐसा कर रहे हैं उनमें कोई अपराध बोध नहीं है। जनता के ख़िलाफ़ मीडिया को जनता ही सपोर्ट करे, पैसे देकर ख़रीदें तो फिर क्या किया जाए।

बीबीसी न्यूज़ पर पूरी खबर पढ़ें : Belarus: Thousands protest outside state TV building

( ये रविश कुमार के फेसबुक अकाउंट से ली गई है )

(क्या अपने ऐसे ही कोई दिलचस्प पोस्ट सोशल मीडिया पर पढ़ी है, अगर हाँ तो उसे हमे ईमेल पर भेज दीजिये. हमारा ईमेल है info@deshkacarvaan.online.)

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