सोशल नजर : GDP -23.9 की ख़बर को धूल मिट्टी में मिलाने के लिए क्या किया जाए, रवीश कुमार की टाइलाइन से

जीडीपी धड़ाम हो गई है. सरकार के कोई उपाए काम नही आयें और जीडीपी के आंकड़ों ने बता दिया की पहले से गिरती हुई अर्थव्यवस्था कोरोना काल में धड़ाम से गिर गई. पत्रकार रविश कुमार ने अपने फेसबुक पर इसको लेकर दो पोस्ट लिखी है. आपको वो दोनों पोस्ट जरूर पढनी चाहिए. आज सोशल नजर के अंक में हम लेकर आयें है वो दोनों पोस्ट .

पहली पोस्ट :

पहली तिमाही की जीडीपी -23.9 प्रतिशत, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं है। आज जीडीपी के आंकड़े आए हैं। भारत की किसी भी पीढ़ी ने ये आंकड़े नहीं देखे होंगे। 5 अगस्त को नए भारत के उदय के बाद इन आंकड़ों ने रंग में भंग डाल दिया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी -23.9 प्रतिशत आई है। सावधान हो जाएं। आर्थिक निर्णय सोच समझ कर लें। बल्कि अब यही ठीक रहेगा कि सुशांत सिंह राजपूत का ही कवरेज देखते रहिए। यह बर्बादी की ऐसी सतह है जहां से आप अब बेरोज़गारी के प्रश्नों पर विचार कर कुछ नहीं हासिल कर सकते। इसका मतलब है कि पढ़ने वाला और लिखने वाला दोनों में से कोई नहीं बचेगा. साधु मरिहें जोगी मरिहें, मरिहें संत कबीर. साधो….अर्थव्यवस्था के बारे में अभी तक झूठ बोला जा रहा है। जो है उसे नहीं बोला जा रहा है। जो होगा या जो नहीं होगा उसके बारे में अनर्गल बातें हो रही हैं कि आपके ज़िले में पेठा बनता है या पुड़िया बनती है, खाजा बनता है या खिलौौना बनाता है, उसके निर्यात से भारत आत्मनिर्भर बनेगा। कमाल है।कोरोना से लड़ाई का एलान हुआ। 64, 500 से अधिक लोग मर गए। हम वो लड़ाई हार गए। देश को तमाम मुद्दों में भटकाया गया। अर्थव्यवस्था के इस हाल में नौजवान पीढ़ी और हम सभी किस हद तक बर्बाद होंगे कल्पना नहीं कर सकते हैं। बेशक मोदी जी बिहार चुनाव की जीत के बाद वाहवाही में लग जाएंगे, उन्हें ऐसी वाहवाहियां बहुत मिली हैं मगर नतीजा क्या निकल रहा है। नतीजा यही निकल रहा है कि नौजवानों के पास नौकरी नहीं, जिनके पास नौकरी थी वो चली गई। जिनके पास है, वो जाने वाली है। गोदी मीडिया लगाकर जनता को बेवकूफ बनाने का खेल बंद हो जाना चाहिए।

दूसरी पोस्ट

GDP -23.9 की ख़बर को धूल मिट्टी में मिलाने के लिए क्या किया जाएक्या कोई ऐसा एक्शन हो सकता है, जैसे किसी की गिरफ़्तारी हो जाए, कुछ घंटे तक एजेंसी के सिपाही दीवार फाँदते रहे, फिर उसे पकड़ कर यहाँ वहाँ ले ज़ाया जाए ताकि विज़ुअल आता रहे, लाइव होता रहे, ताकि कई घंटे तक लाइव कवरेज होने से आज और कल का टाईम निकल जाए ? जैसे चिदंबरम के समय हुआ था जिससे कुछ अभी तक निकला नहीं। ऐसी किसी घटना उन्हें सुझा दें ताकि प्राइम टाइम कवरेज में ब्रेकिंग न्यूज़ की बाढ़ आ जाए। वैसे ये भी करने की ज़रूरत नहीं है। टीवी वाले वैसे ही सुशांत सिंह राजपूत के कवरेज में डूबे हुए हैं। वहाँ वैसे भी भारत के अर्थव्यवस्था के पतन की कहानी नहीं चलनी है। जो लोग तालाबंदी के समय ट्विटर पर बिग बॉस से थाली बजाने जैसा टास्क माँग रहे थे उनकी मदद ली जाए। वो आगे आएँ और लोगों को टास्क दें ताकि अर्थव्यवस्था की बर्बादी की खबर को ग़ायब किया जाए।

( सोशल नज़र के अंकों में हम सोशल मीडिया पर किसी के द्वारा लिखी गई कोई आर्टिकल जो हमारे संपादक को अच्छी लगती है वो आपके लिए लेकर आतें हैं. इस पोस्ट में लिखी गई किसी भी शब्द पर देश का कारवां अपना कॉपीराइट नही पेश करता है.)

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