मोदी के PM बनने के बाद अडानी की संपत्ति में हुआ 230 फीसदी इजाफा तो राहुल ने पूछा – “और आपकी ?”

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी हमेशा से मोदी सरकार को सूट – बूट की सरकार कहते रहे हैं . उनका यह तंज मोदी के उद्योगपतियों के करीब होने और पूंजीपतियों के हित में फैसले लेने पर होता है . 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो 2 साल के अन्दर ही ऐसे फैसले लेने लगे जिससे पूंजीपतियों को फायदा होने लगा . नरेन्द्र मोदी के साथ सबसे ज्यादा अम्बानी और अडानी का नाम जोड़ा जाता है . राहुल गाँधी तो मोदी के साथ अम्बानी और अडानी का नाम जोड़ने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते . लेकिन क्या राहुल गाँधी और विपक्ष का आरोप निराधार है ?

केंद्र की मोदी सरकार ने 2018 में ऐसा फैसला लिया जिससे उद्योगपतियों की चांदी हो गई. दरअसल, 2018 में जब देश के 6 एयरपोर्ट्स के निजीकरण का फैसला लिया गया तब नियमों में ढील दी गई जिससे ऐसी कंपनियां भी बोली लगा पाई जिन्हें इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं था. इसका सीधा फायदा गौतम अडानी को मिला और सभी एयरपोर्ट का ठेका उन्हें ही मिल गया. फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अडानी उन कारोबारियों में से एक हैं जिनकी 2014 के बाद से अधिक मौजूदगी दर्ज की गई है. बंदरगाहों के ओपरेशन और थर्मल कोल पॉवर प्रोड्यूसर के मामले में भी उनकी कंपनी आगे रही और साथ ही अडानी ग्रीन एनर्जी को 8 गीगावाट का सोलर प्लांट बनाने का ठेका भी मिला.

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गौतम अडानी भी मुकेश अम्बानी की ही तरह गुजरात से आते हैं . जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के सीएम थे तभी से अडानी के साथ उनकी दोस्ती थी . कहा जाता है कि उस समय भी अडानी को बहुत फायदे मिले थे . ये दोस्ती मोदी के पीएम बनने के बाद भी जारी रही और इसलिए 2014 के बाद से अम्बानी के साथ – साथ अडानी की भी संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि हुई . यह वृद्धि 230 फीसदी दर्ज की गई है. विपक्ष और राहुल के आरोपों को मोदी सरकार की नीतीयाँ ही सही साबित कर देती हैं. जब यह खबर सामने आई तो राहुल गाँधी ने ट्वीट करके तंज भी कस दिया. राहुल ने ट्वीट करके लोगों से पूछा – “आपकी संपत्ति कितनी बढ़ी?”

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