पर्दे के पीछे दिखती हैं लेकिन फ्रंट फुट पर बैटिंग कर रही हैं प्रियंका, कब – कब उलझनों को सुलझाने में रही हैं सूत्रधार ?

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कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बहुत देर के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा लेकिन अपनी माँ सोनिया गाँधी और भाई राहुल गाँधी के लिए रायबरेली और अमेठी का सारा कामकाज और प्रचार वही संभालती थीं. अब प्रियंका के कंधो पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस संगठन को वापस खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी है. लेकिन प्रियंका गाँधी इससे भी बढ़कर पार्टी की उलझनों को सुलझा रही हैं. मीडिया और लाइमलाइट से ज्यादातर खुद को दूर रखने वाली प्रियंका के लिए कहा जाता है कि वो पर्दे के पीछे रह कर राजनीति करना पसंद करती हैं पर पिछले कुछ घटनाक्रम पर नजर डाले तो हम प्रियंका गाँधी को फ्रंट फुट पर खेलते हुए देख पाएंगे .

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एकदम ताज़ा उदाहरण है पार्टी के असंतोष नेताओं को मनाकर बातचीत के टेबल पर लाने का. सूत्रों की माने तो वह प्रियंका ही हैं जिनके कारण 23 असंतुष्ट नेता 19 दिसंबर को सोनिया गाँधी के साथ बैठक पर पहुँच पाए. संगठन में बदलाव और सुधर के लिए सार्वजानिक पत्र लिखने और बयानबाजी के बाद पार्टी और हाई कमान की जबरदस्त किरकिरी हुई हुई थी जिसके बाद आपस में बैठकर बातचीत कर पाने का रास्ता बंद होता दिख रहा था. लेकिन प्रियंका गाँधी सलाहकार बनकर उभरीं और सुलह के दरवाजे खोले. प्रियंका गाँधी के विश्वासपात्र लोग 23 असंतुष्ट नेताओं के संपर्क में थे और उन्हें समझा रहे थे कि बीजेपी का मुकाबला एकजुट रहकर ही किया जा सकता है. बातचीत तो असंतुष्ट नेता भी करना चाहते थें लेकिन पार्टी की किरकिरी कराने के बाद उनकी तरफ से पहल संभव नहीं था.

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पार्टी के वरिष्ट नेताओं , अहमद पटेल और तरुण गोगोई को श्रद्धांजलि देने के लिए 27 नवंबर को हुई वर्चुअल मीटिंग से रास्ते खुले. इस मीटिंग में सबका आमना – सामना हुआ तो प्रियंका ने सबको समझाते हुए कहा कि हमारे नेताओं को हमारे तरफ से सच्ची श्रद्धांजलि यह होगी कि हम एक हो जाएँ और बातचीत करें. सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गाँधी ने आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद से बात की. वह प्रियंका ही थीं जिन्होंने सबसे पहले पहल की और सभी को बातचीत के लिए तैयार किया . इससे पहले भी जब राजस्थान में राजनैतिक संकट उत्पन्न हुए थे तब सचिन पायलट से लगातार संपर्क में रहकर प्रियंका गाँधी ने हल निकाला था . प्रियंका गाँधी ने पायलट से बातचीत करके राहुल के साथ मीटिंग करवाई थी और तब राजस्थान का संकट सुलझा था. भविष्य में प्रियंका गाँधी पार्टी के लिए सलाहकार और संकटमोचक की भूमिका निभा सकती हैं.

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