अहमद पटेल के बाद ये बना कांग्रेस का संकटमोचक, पहले बार में ही खत्म कर दिया गतिरोध

अहमद पटेल ने कांग्रेस के लिए परदे से पीछे रहकर भी बहुत सारी लड़ाई जीती. अहमद पटेल ऐसे नेता थें जिन्हें लोग कांग्रेस का संकटमोचन मानते थें. सोनिया गाँधी के राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल ने कई बार अपनी रणनीतिक सूझ बुझ से पार्टी के भीतर और बाहर के कई गतिरोधों को दूर किया था. अहमद पटेल ने कई मुद्दों पर पार्टी के भीतर सहित बाहर भी गतिरोध खत्म किया और पार्टी को मुसीबतों से बाहर निकाला. मगर इस साल 2020 में कांग्रेस पार्टी ने अपना ये अनोखा सिक्का हमेशा के लिए खो दिया. अभी कांग्रेस को ऐसे नेताओं की जरुरत है जो पार्टी को मजबूत बना सकें. संकटों से घिरी कांग्रेस को संकट मोचन की दरकार थी.

फाइल फोटो

अभी ऐसे वक्त में जब कांग्रेस बहुत बुरी स्तिथि में है, पार्टी के भीतर से भी बड़े पैमाने पर विरोधाभास है. पार्टी के कई बड़े नेता पिछले कुछ दिनों से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थें. लगभग 23 बड़े नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के लिए बदलाव की मांग की थी. हाल हीं में हुए 10 जनपथ पर बैठक में इस गतिरोध को सुलझा लिया गया है. दबे स्वर में कांग्रेसी सूत्रों का ये कहना है कि अब एक नाम पर पार्टी के भीतर एक सहमती बन गई है. हालाँकि नाम अभी जाहिर नहीं किया गया है. मगर पार्टी के अंदर उठें इन विरोधाभाषों को कांग्रेस के भीतर सुलझाने का काम प्रियंका गाँधी ने किया है. प्रियंका गाँधी कांग्रेस के लिए नयी संकटमोचक बन कर उभरी.

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10 जनपथ को हुई मीटिंग की पूरी पटकथा खुद प्रियंका गाँधी ने हीं लिखी थी. प्रियंका गाँधी ने न सिर्फ ये सुनिश्चित किया कि ये गतिरोध खत्म किया जाए बल्कि उन्होंने ये भी सुनिश्चित किया की कार्यकर्ताओं में भी एकता का सन्देश जाए. मीटिंग के पहले से हीं 10 जनपथ में मौजूद प्रियंका गाँधी ने हीं सभी नेताओं का आगमन किया और मीटिंग के दौरान थोड़ी बहुत हुई मतभेदों का समाधान किया. प्रियंका गाँधी ऐसे समय में संकट मोचक बन कर उभरी जब कांग्रेस को सबसे ज्यादा जरुरत थी.

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